Tuesday, January 1, 2019

हनुमानजी की जाती और हनुमानजी का धर्म

आजकल एक चर्चा जोरों पर है। हनुमानजी की क्या जाती है। बड़ा जटिल विषय है और लोगों की आस्था से भी जुड़ा है। वैसे कहते हैं आस्था से नहीं खेलना चाहिए नहीं तो आप का वो कहते हैं नाश्ता बना दिया जायेगा। शब्द थोड़े साहित्यक नहीं है मगर हकीकत के काफी करीब है।  इसलिए हनुमानजी की जाती के प्रश्न को हम यहीं पर छोड़ देते हैं। मगर फिर भी सवाल उठता है की जाती और धर्म का निर्धारण कैसे होता है?

जाती और धर्म का निर्धारण कैसे होता है? आवाज आयी की आपकी जाती या धर्म इस बात पर निर्भर करती है की आपने किस घर में जन्म लिया है। आपके माता पिता की जाती और धर्म आपकी जाती और धर्म का निर्धारण करती है। तो मन में विचार आया की माता पिता की जाती और धर्म किसने निर्धारित की? आवाज आयी उनके माता पिता की जाती और धर्म ने। हम इतिहास में जाने लगे और आवाज मौन होती गयी। खैर अब सवाल उठा है तो उसका जवाब भी चाहिए। हम इतिहास में घुसने लगे। साल, दशक और सदियां गुजरने लगी।

जाती बदलने लगी, फिर धर्म भी बदलने लगे। चीजें धुँधली होती गयी। मैं इतिहास के उस बिंदु पर आकर खड़ा हो गया जहाँ से आगे बहुत सारे रास्ते निकलते थे। एक रास्ता डार्विन का जो जंगल लेकर जाता है और बन्दरों के बीच पहुँचा देता है। वैसे कोई भी रास्ता पकड़ो, हर रास्ता अंत में एक उस जोड़े तक पहुँचता है जिन्हें हम दुनिया के पहले माँ बाप कह सकते हैं। एक बार उनका धर्म हम धर्म विशेष से जोड़ भी दें तब भी उनकी जाती क्या थी? किसी को पता नहीं । और अगर जाती होगी भी तो वह एक ही जाती हो सकती है।

जाती और धर्म का रहस्य बहुत गहरा है। हम सब अपनी अपनी सुविधानुसार अपने वैकल्पिक सत्य (alternate truth ) में जी रहे हैं। गलत भी नहीं है। मगर गलत तब हो जाता है जब हम अपने सत्य को परम सत्य मान लेते हैं। और ज्यादा गलत तब हो जाता है जब हम दूसरों के सत्य को झूठ बताने लगते हैं। और सबसे ज्यादा गलत तब हो जाता है जब झूठ को साबित करने के लिए हम हिंसा पर उतारू हो जाते हैं।

अगर दुनिया का ईश्वर आकर यह घोषणा कर दे की इंसान जिस धर्म अथवा जाती से सबसे ज्यादा घृणा करता है, अगले जन्म में उसे वही जाती और धर्म में जन्म दिया जायेगा तो जाती और धर्म की समस्या का अपने आप ही समाधान हो जाएगा।

हनुमानजी को अमर होने का वरदान है। इस वक्त शायद हनुमानजी हिमालय की किसी गुफा में या किसी समुद्री द्वीप में बैठ कर सोच रहे होंगे की प्रभु श्रीराम ने कैसे लोगों का भगवान बना दिया?

शिक्षा है मौलिक अधिकार

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