Tuesday, August 19, 2014

मांझी का इंतजार





मांझी का इंतजार, सफ़र को बेकरार
लहरें रह रह कर, कर रहीं पुकार
पल की बेचैनी में गूँधा, जीवन का सार
विरह का पल, मिलन के पल को बेकरार

लहर की एक छींट, सिहर जाता रोम
सिकुड़ता तन, स्वच्छन्द होता मन
फिर बूँदों का रेंगना, एक अहसास
पानी में भरी, अद्‍भुत प्यास



1 comment:

  1. Honestly speaking, I like the piece but, I guess that you can add another version here as well. For example, you can add an English interpretation.

    ReplyDelete