Monday, January 13, 2020

पहचान

जब तक जिंदा हूँ लाश हूँ
जिस दिन मर जाऊंगा
मेरी कौम ढूंढ लेना
जला देना या दफना देना
या लटका देना दरख़्तों पर
चील कौवे गिद्ध नोंच लेंगे

फितरत में मेरे कुछ नहीं है
फिर भी मैं सब कुछ हूँ
राजा भी हूँ रंक भी हूँ 
आज भी जीता हूँ 
इसी अहसास में
मैं हूँ मैं ही मैं हूँ

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