Saturday, May 12, 2018

नेताजी ठेंगा राम

ठेंगा राम शहर के जाने माने नेता हैं | फ़िलहाल शहर का राज्य के विधानसभा में भी प्रतिनीधित्व करते हैं | वैसे उनका नाम ठेंगा राम नहीं है मगर शहर की आम बोलचाल की भाषा में इसी नाम से जाने जाते हैं | असली नाम क्या है ये महत्वपूर्ण भी नहीं इस कहानी के लिए | नाम पड़ने की भी एक खास वजह है | चुनाव से पहले राम राम करते हैं और चुनाव के बाद ठेंगा दिखा देता हैं | शहर के पास बहुत विकल्प भी नहीं हैं | अगर ठेंगा राम को न चुना जाये तो दूसरा विकल्प भुल्लकड़ राम का है | वो तो भूल ही जाते हैं की उनका चुनाव शहर की प्रगति और उन्नति के लिए हुआ है | ये भी संयोग है की ठेंगा राम की पत्नी का नाम प्रगति और भुल्लकड़ राम की पत्नी का नाम उन्नति है और उनका विकास दिन दुनि रात चौगनी गति से हो रहा है | अब तो दोनों मोहतरमाओं ने अपने ही घर में जिम बनवा लिया है ताकि विकास को नियंत्रित किया जा सके |

खैर हम वापस अपने ठेंगा राम की बात करते हैं | चुनाव सर पर आ रहा है तो उनकी राम राम की रफ़्तार काफी तेज हो गयी है | आजकल काफी मिलनसार भी हो गए हैं | सवेरे सैर भी करते दिखाई देते हैं और कोई भी बगल से गुजरे तो उसका एक बार हाथ थाम के हाल चाल पूछना नहीं भूलते | चंद  महीनो पहले तक तो वो शहर में दिखाई भी नहीं देते थे | सुना है लन्दन में कोई नया कारोबार शुरू किया है | वैसे भी आजकल नेताओं का लंदन में ठिकाना होना जरूरी है| पता नहीं कब उस घर को अपना परमानेंट पता बनाना पड़ जाए | 

कभी कभी कुछअस्भय नागरिक भी मिल जाते हैं | वो याद रखते हैं की नेताजी ने पिछले चुनाव में क्या वायदा किया था | वो भूल जाते हैं की हिंदी फिल्मों का मशहूर गाना है, "वादा तो टूट जाता है "| 

ऐसे ही एक असभ्य नागरिक ने एक बार नेताजी से पूछ लिया | 

"नेताजी आपने वायदा किया था की हमारी कॉलोनी में पानी का पाइप आ जायेगा |"

नेताजी भी घाघ आदमी | सवाल सुन के अनसुना कर दिया और उसके बगल में खड़े एक बुजुर्ग से आँख मिला कर बोले 

"बाबा कैसी सेहत है | तबियत तो ठीक रहती है |"

बुजुर्ग थोड़ा सकपका गया | नेताजी को उसकी तबियत की चिंता ? उन्होंने अगल बगल भी देखा की कोई और बीमार व्यक्ति तो नहीं है | मगर उसे अहसास हुआ की नेताजी की आँखें उनकी ही आँखों को टकटकी लगे देख रही थीं | 

बुजुर्ग ने जैसे ही बोलने की मुँह खोला, नेताजी उससे पहले बोल पड़े 

"ख्याल रखियेगा | कोई जरूरत हो तो बताइएगे |", यह बोल कर वह आगे बढ़ने लगे | 

मगर वह असभ्य आदमी थोड़ा उच्च दर्जे का असभ्य था | वह नेताजी के सामने आ गया और उनका रास्ता रोक कर खड़ा हो गया | 

"नेताजी आपने वायदा किया था की हमारी कॉलोनी में पानी का पाइप आ जायेगा |"

"पानी का पाइप ", नेताजी के हलक से शब्द धीरे से टपके | 
"जी, पानी का पाइप", असभ्य नागरिक वापस बोला | उसकी आवाज़ में रोष भी झलक रहा था | 

अब थोड़ी भीड़ भी इकट्ठी हो गयी और हर कोई नेताजी से जवाब के उम्मीद लगा बैठा | पानी का पाइप तो इन्हे भी चाहिए था मगर वो इतने असभ्य नहीं थे | 

नेताजी ने भाँप लिया की अब बिना जवाब दिए काम नहीं चलेगा | उन्होंने असभ्य नागरिक को देखकर एक फींकी से हंसी दी और अपने राजनितिक अस्त्रों का इस्तेमाल करना शुरू किया | 

"कोनसे वाले पानी के पाइप की बात कर रहे हैं आप |"
"वही जो हमारी अमर कॉलोनी में आने वाली थी |" एक दूसरा नागरिक भी हिम्मत जुटा कर असभ्य बन गया | 

नेताजी ने अपने सेक्रेटरी की और देखा और आँखों से इशारा किया | सेक्रेटरी ने मौके की नजाकत को देखते हुए तुरंत मोर्चा संभाल लिया | 

"नेताजी को उस पाइपलाइन का वायदा पूरी तरह याद है | उन्होंने इसे विधानसभा में भी उठाया है | उन्हें मंत्रीजी ने अश्वाशन  दिया है की जैसे ही इस बार सरकार  बनेगी सबसे पहला काम कमर कॉलोनी की पाइप का होगा |"

"कमर नहीं अमर कॉलोनी |" अब एक तीसरा नागरिक  भी असभ्य हो चुका था और वह काफी आक्रामक भी प्रतीत हुआ |  सेक्रेटरी ने भांप लिया की स्तिथी नियंत्रण से बहार जा रही है | 

"हाँ, हाँ अमर कॉलोनी |" 

सेक्रेटरी ने हँसते हुए दोहराया  और फिर जोर से चिल्लाया | 

"नेताजी जिंदाबाद | भारत माता की जय |"

इशारा काफी था समर्थकों के लिए | अगल बगल से बहुत सारे चेले चपाटे आ गए और सब असभ्य नागरिकों को अगल बगल कर दिया | नेताजी ने हाथ जोड़े  और तेजी से आगे निकल गए | 

यही हालत है हमारे गणतंत्र की | यहाँ महत्वपूर्ण सवाल कोई मायने नहीं रखते | नेताजी को भी पता है वोट तो उन्हें नोट दे कर ही खरीदना है |

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